श्री जिनवाणी पूजन (श्रुतपंचमी विशेष)
जिनवाणी पूजन स्थापना (रोला) देव धर्म गुरु दुर्लभ है इस काल में, किन्तु शास्त्र सुलभ है पुण्य प्रभाव में। जो समझे जिनवाणी मुक्ति पाते है, वीतराग वाणी के गुण हम गाते है।। ॐ ह्रीं श्री जिनवाणी-मात:! अत्र अवतर अवतर संवौषट् । ॐ ह्रीं श्री जिनवाणी-मात:! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठ : ठ : । ॐ ह्रीं श्री जिनवाणी-मात:! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् । ...