No Arguments, मैं कुछ सुनना नहीं चाहता
वर्तमान समय में हमारी सबसे बड़ी समस्या है कि मैं कुछ नहीं सुनना चाहता। हमारे जीवन में कोई भी बात हो जाती है, कोई भी घटना घट जाती है, या हमारे साथ काम करने वाले व्यक्ति से जैसा उसे कहा गया है वैसा ना करके वो गलती से कुछ और कर देता है तो हम उस पर विचार नहीं करते बस उसको दोष दे देते है, हमारे घर-परिवार में, विद्यालय में, हमारे ऑफिस में, समाज में, सब जगह ऐसा होता है कि यदि हमारे सामने कोई व्यक्ति है वह हमसे कुछ कहना चाहता है तो हम उसकी बात सुनना ही नहीं चाहते। पता नहीं हम कौन सी जल्दी में होते है, कि शीघ्र ही बिना सोचे-समझे, उचित-अनुचित का विचार किए बिना ही निर्णय ले लेते है, सामने वाले को अपनी बात तक कहने का अवसर नहीं देते। इसी कारण से हमारे यहां बहुत सी गलतफहमियां जन्म ले लेती है, जिसके कारण से जीवन भर हम अपनों से ही बैरभाव रखते है, हम अपने इतने अच्छे जीवन में स्वयं ही अपने हाथो से जहर घोल लेते है। वास्तव में बहुत बड़ी समस्या है ये कि में कुछ नहीं सुनना चाहता। हमारे परिवार में जब कोई व्यक्ति ऑफिस का कार्य कर रहा होता है, या किसी विशेष चिंता में होता है तो हम अपने बच्चों की बात...