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कानजीस्वामी (सोनगढ़िया पंथ ) और वर्तमान दिगम्बर जैन पंथ में क्या अन्तर है...

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कानजी स्वामी कौन है वो दिगम्बर जैन है अथवा श्वेताम्बर? कानजी स्वामी का जन्म गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र के एक छोटे से गाँव उमराला में 1890 में एक स्थानकवासी परिवार में हुआ था। हालाँकि वह अपने विद्यालय में एक योग्य छात्र थे, लेकिन उन्हें हमेशा यह आभास होता था कि सांसारिक शिक्षाएँ ऐसी चीज़ नहीं थीं जिनकी उन्हें तलाश थी। जब वह तेरह वर्ष के थे तब उनकी माँ का देहांत हो गया और सत्रह वर्ष की आयु में उनके पिता का देहांत हो गया। इसके बाद, उन्होंने अपने पिता की दुकान संभालनी शुरू कर दी। उन्होंने दुकान में खाली समय का उपयोग धर्म और अध्यात्म पर विभिन्न पुस्तकें पढ़ने में किया। शादी के प्रस्तावों को ठुकराते हुए, उन्होंने अपने भाई से कहा कि वह ब्रह्मचारी रहना चाहते हैं और संन्यास लेना चाहते हैं। वे बालपन से ही साधु-सन्तों को देखकर प्रसन्न होते थे, उनकी वैयावृत्ति करना तथा उनसे जिनवाणी का ज्ञान प्राप्त करना उन्हें अच्छा लगता था, मुक्ति की अभिलाषा को लिए हुए अधिक समय धार्मिक समय वातावरण में बीते यह विचारकर उन्होंने भी स्थानकवासी सम्प्रदाय में दीक्षा ग्रहण की, तब दीक्षा उत्सव के समय गजराज हाथी पर सवार...

धर्म और परम्परा एक सामान्य परिचय

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  धर्म शाश्वत है और परम्पराएं परिवर्तनशील होती है  अर्थात् बदलती रहती है ।  कोई भी द्रव्य हो, कोई भी क्षेत्र हो, कोई भी काल हो, और कोई भी भाव हो, धर्म कभी नहीं बदलता , सदा एक जैसा ही रहता है, जैनदर्शन के दिगम्बर संत कार्तिकेय मुनिराज ने कहा है "वत्थु सहावो धम्मो" अर्थात् वस्तु का स्वभाव धर्म है और स्वभाव वो होता है जो सदा एक जैसा रहे, जिसका कभी नाश न हो, जैसे शक्कर का स्वभाव है मिठास जो कभी नहीं बदलता।  किसी भी व्यक्ति के लिए, किसी भी क्षेत्र में, किसी भी काल में, किसी भी भाव में शक्कर अपनी मिठास को कभी नहीं छोड़ती, यदि मिठास ही न हो, तो शक्कर भी नहीं होगी। इसलिए वही उसका स्वभाव है और वही उसका धर्म है उसी प्रकार आत्मा का स्वभाव है ज्ञान-दर्शन आदि जानना-देखना जो की सदैव रहता है निगोद में भी जीव अपने स्वभाव को नहीं छोड़ता और स्वभाव ही धर्म है तथा धर्म सदैव शाश्वत होता है।  किन्तु परम्परा द्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव के अनुसार बदलती रहती है, कभी किसी व्यक्ति के कारण से, किसी क्षेत्र के कारण से, किसी समय के कारण से अथवा किसी परिणाम के कारण से कोई एक नियम, रीति अथवा परम...